Rs 499

Category: Non-Fiction · Publisher: Clever Fox Publishing
Author: Dr. Suman Kumar Das
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पुस्तक का संकल्प
यह ग्रंथ उस सनातन सत्य को पुनर्स्थापित करता है कि —
> धर्म का प्रथम और श्रेष्ठ आश्रम — गृहस्थ आश्रम है।
क्योंकि वही
ऋषि-पथ, राष्ट्र-पथ, संतति-पथ और समाज-पथ का आधार है।
जब ब्रह्मचारी ज्ञान लेकर लौटता है,
जब संन्यासी तप से लौटा करुणा बनता है —
तो बीच में गृहस्थ ही है
जो ऋण चुकाता, पुण्य कमाता और सृष्टि चलाता है।
इसी सृष्टि-धर्म का संहिताबद्ध उपदेश है यह पुस्तक।
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ग्रन्थ का उद्देश्य
मनुस्मृति के तत्त्वों को
आधुनिक गृहस्थ जीवन और
व्यावहारिक धर्म-नीति-नैतिकता के साथ
एकीकृत रूप में स्थापित करना।
यह कोई सामाजिक-दमन ग्रन्थ नहीं —
यह नीतिशास्त्र + जीवन-विज्ञान + करुणा-धर्म का दीप है।
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मुख्य सूत्र
धर्म = संतुलित कर्तव्य
परिवार = आध्यात्मिक सहयोग प्रणाली
संतति = धर्म का प्राकट्य
विवाह = कर्म-योग का युग्म
धन = सेवा एवं यज्ञ का साधन
राज्य = धर्म-संरक्षक संस्था
ऋतचक्र = जीवन-नियम
व्यवहार = न्यायपूर्ण अनुशासन
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प्रेरणा
आज का मनुष्य भोग में डूबकर —
धर्म, नीति, परिवार और प्रकृति का संतुलन खो चुका है।
यह ग्रंथ स्मरण कराता है:
गृहस्थ ही युग का याज्ञनिक नाभिक है।
> “घर यदि धर्ममय हो जाए तो
समाज स्वतः सत्यमय हो जाता है।”
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शास्त्रीय आधार
वेद, स्मृति, उपनिषद
मनु, याज्ञवल्क्य, पराशर
गीता, पुराण, नीतिशतक
गृह्यसूत्र, धर्मसूत्र
काम्यकर्म एवं पंचमहायज्ञ
श्रौत-स्मार्त साधना
किंतु —
प्रस्तुति आधुनिक, स्पष्ट और व्यवहारिक।
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वैज्ञानिक-आधुनिक दृष्टि
मनोविज्ञान: ऋतुगत व्यवहार नियम
समाजशास्त्र: परिवार न्यूरो-इकॉनॉमी
न्यूरोसाइंस: निष्ठा-अनुशासन-ध्यान
जैव-नीति: श्रेष्ठ संतति-चेतना
अर्थनीति: गृहस्थ-उद्योग एवं सतत आर्थिकता
आचार-संहिता: सम्मान, कर्तव्य, निषेध
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किसके लिए?
गृहस्थ साधक
युवा दंपति
नीति-शास्त्र के विद्यार्थी
धर्म-विज्ञान शोधार्थी
समाज-नायक, गुरु, वंश-विन्यासकर्ता
संस्कृति-सेवक एवं नीति-निर्माता
ग्रन्थ का सार
> यह पुस्तक मनु का भय नहीं —
मनु का धर्म देती है।
> यह ‘नियंत्रण’ नहीं —
जीवन-संतुलन का व्रत है।
> यह स्त्री-पुरुष विरोध नहीं —
ऋत-द्वंद्व की समरसता है।
> यह भूतकाल की नकल नहीं —
सनातन सिद्धांतों का आधुनिक पुनर्जन्म है।
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