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![चरित्र - दो फेरे [Charitra – Do Phere]](/_next/image?url=%2Fapi%2Fuploads%2Foptimized-4b25042afc0033deed9cd6ac.webp&w=3840&q=75)
Category: Literature & Fiction · Publisher: Clever Fox Publishing
Author: Shweta Jain
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मानव जीवन केवल घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि उन घटनाओं के बीच लिए गए निर्णयों की कहानी है। हर व्यक्ति के भीतर एक चरित्र होता है—जो परिस्थितियों के साथ बदलता, टूटता, सँवरता और कभी-कभी बिखर भी जाता है। “चरित्र दो फेरे” ऐसी ही एक कथा है, जहाँ रिश्तों की मर्यादा, भावनाओं की उलझन और सामाजिक मान्यताओं के बीच एक स्त्री का जीवन दो मोड़ों—दो “फेरों”—से होकर गुजरता है।
यह कहानी रानीला की है—एक साधारण, संवेदनशील और सपनों से भरी लड़की, जिसे जीवन बार-बार ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा करता है जहाँ उसे अपने मन, समाज और संबंधों के बीच चुनाव करना पड़ता है। एक ओर उसका अतीत है, जिसमें दर्द, असुरक्षा और अधूरे सपने हैं; दूसरी ओर भविष्य, जो अनिश्चित है पर संभावनाओं से भरा है।
कहानी केवल रानीला की नहीं, बल्कि उन सभी स्त्रियों की है जो परिस्थितियों के दबाव में अपने निर्णयों को टालती हैं, और फिर एक दिन खुद को उसी चौराहे पर खड़ा पाती हैं—जहाँ उन्हें अपने अस्तित्व के लिए आवाज़ उठानी होती है।
इस उपन्यास में रिश्तों की जटिलता, भावनाओं की गहराई और समाज के दोहरे मानदंडों को सहज भाषा में प्रस्तुत किया गया है।
यह प्रश्न भी उठता है—क्या त्याग ही स्त्री का धर्म है, या उसे अपने सपनों के लिए जीने का भी अधिकार है?
“चरित्र दो फेरे” केवल एक कहानी नहीं, बल्कि आत्मबोध की यात्रा है—जहाँ हर मोड़ पर चरित्र की असली परीक्षा होती है।
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